लेकर इंतजार करो तब मिलेगा किताबों का सेट, पक्का बिल भी नहीं

लेकर इंतजार करो तब मिलेगा किताबों का सेट, पक्का बिल भी नहीं

 

भोपाल। राजधानी के निजी स्कूल खुल गए हैं और अभिभावकों को नए सत्र की किताबों के सेट की स्लिप भी दी जा रही है। इतना ही नहीं स्कूल द्वारा अभिभावकों को किताबें खरीदने के लिए निश्चित दुकान का नाम भी सुझाया जा रहा है। अब अभिभावक तीन हजार से चार हजार रुपए में मिलने वाली किताबों के सेट लेने के लिए बुक स्टॉल पर पहुंच रहे हैं। राजधानी के हर बुक डिपो पर अभिभावकों की भीड़ जुट रही है।

भीड़ से बचने के लिए बुक डिपो संचालकों ने टोकन सिस्टम लागू किया है। जहां अभिभावकों को टोकन दिया जा रहा है और आधे से एक घंटे तक इंतजार करने के लिए कहा जा रहा है। इसके बाद स्कूल और कक्षा का नाम बताने पर उन्हें किताबों का सेट दिया जा रहा है। लेकिन किसी को भी पक्का बिल नहीं दिया जा रहा है, सिर्फ नाम के लिए कच्चा बिल थमा दिया जाता है।

पांच से छह बुक डिपो पर मिल रहीं किताबें

राजधानी के इंद्रप्रस्थ, बुक एंड बुक्स, गुरुकुल, राजेश बुक डिपो, रागिनी बुक डिपो सहित पांच से छह बुक डिपो पर सभी स्कूलों की किताबें उपलब्ध हैं। इन दुकानों पर किताबों का सेट बनाकर रखा गया है। यहां स्कूल और कक्षा का नाम बताने पर किताबें दी जा रही हैं।

किताबों के सेट के साथ कवर पेपर, पेंसिल, फाइल भी

अभिभावकों का कहना है कि किताबों के नाम पर दुकान वाले खुलकर लूट रहे हैं। किताबों के सेट के साथ ही फाइल, कवर पेपर, पेंसिल, रबर, कलर सेट, कलर पेपर, कटर भी दे रहे हैं। इसके अलावा इन्हें रखने के लिए बैग भी दे रहे हैं। अगर आपके पास ये सब चीजें हैं, तब भी आपको किताबों के सेट के साथ ये सामान लेना ही होगा। इन सभी चीजों को जोड़कर दुकान वाले महंगे सेट बना रहे हैं।

अनावश्यक किताबें भी शामिल

सभी कक्षाओं में 10 से 15 किताबें चलाई जा रही हैं, जिससे किताबों का सेट महंगा मिल रहा है। खासतौर पर पहली से छठवीं कक्षा तक सभी निजी प्रकाशकों की 10 से 12 किताबें चलाई जा रही हैं।

कच्चे बिल दे रहे

अभी बुक स्टॉल पर टोकन देकर नंबर आने पर किताबों का सेट दिया जा रहा है। बुक स्टॉल पर दुकान का पक्का बिल नहीं दे रहे हैं, हाथ से लिखकर बिल बनाकर दे रहे हैं।

– बीएस तिवारी, अभिभावक

अनावश्यक किताबें भी दे रहे

सभी बुक स्टॉल पर स्कूल और कक्षा का नाम बताने पर किताबों का सेट दे रहे हैं। दुकान वाले किताबों का पूरा सेट दे रहे हैं और पक्का बिल भी नहीं दे रहे हैं। सेट की कई किताबें अनावश्यक होती हैं, जिनका कोर्स से कोई मतलब नहीं रहता है।

-डीपी कनोजिया, अभिभावक

पांच हजार का मिला सेट

हर साल स्कूल की तरफ से बुक डिपो का नाम सुझाया जाता है। बुक डिपो पर टोकन के माध्यम से आधे घंटे इंतजार के बाद किताबें दी गईं। आठवीं कक्षा की किताबों का सेट लगभग 5000 रुपए में मिला।

– रीना बरुआ, अभिभावक

कलेक्टर को ज्ञापन देंगे

पालक महासंघ मंगलवार को कलेक्टर से मिलकर निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए ज्ञापन देगा। साथ ही कार्रवाई करने की मांग की जाएगी। अगर कार्रवाई नहीं करेंगे तो हम उग्र आंदोलन करेंगे।

– कमल विश्वकर्मा, अध्यक्ष, पालक महासंघ