भोपाल को मिलना था 5 स्टार रेटिंग, मिला 2 स्टार

भोपाल को मिलना था 5 स्टार रेटिंग, मिला 2 स्टार

 

भोपाल। स्वच्छता सर्वेक्षण में भोपाल को देश की नंबर वन राजधानी का तमगा भले ही मिले गया हो, लेकिन देशभर के शहरों में दो से घटकर 19वें स्थान पर पहुंच गया है। स्वच्छता के सभी पैरामीटर्स में बेहतर अंक मिले, लेकिन स्टार रेटिंग में फाइव स्टार की जगह टू स्टार दे दिया गया। पायदान खिसकने का यही कारण बना। निगम अफसरों ने समीक्षा के दौरान स्टार रेटिंग घटने पर सवाल उठाए।

दरअसल, भोपाल नगर निगम ने सेवन स्टार रेटिंग के लिए अप्लाई किया था, वार्ड नंबर एक से 85 तक का डाटा दिया गया। शहरी विकास मंत्रालय ने इसके योग्य पाते हुए फील्ड पर टीम को भेजा। नियमानुसार यदि सेवर स्टार रेटिंग में फेल भी होते तो कम से कम सेवन की जगह फाइव स्टार रेटिंग दिया जाना था। यानी निगम को इसके 600 अंक मिलने थे। लेकिन टू स्टार रेटिंग देकर महज 350 अंक ही दिए गए। यानी 250 अंक कट गए।

खास बात ये है कि बाकी पैरामीटर्स में निगम ने 1250 में से 1150 तक अंक प्राप्त किए हैं। ये नंबर उन्हीं पैरामीटर्स के मिले हैं, जो स्टार रेटिंग में शामिल किए गए थे। फिर स्टार रेटिंग में कटौती अधिकारियों के गले से नीचे नहीं उतर रही है।

100 प्रतिशत गीले और सूखे कचरे का सेग्रिगेशन

इंदौर ने वर्ष 2017-18 में घरों से गीला-सूखा कचरा अलग-अलग लेना शुरू किया गया था। इसके अलावा नेपकिन और पेड जैसे बायोवेस्ट को लेने के लिए देश में पहली बार निगम की गाड़ियों के पीछे अलग से डिब्बे लगाए गए।

भोपाल में गीले-सूखे कचरे को अलग अलग लेने के लिए अभियान तो चलाया गया, लेकिन इसे अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। हालांकि, कंपोस्ट प्लांट में सेग्रिगेशन किया जा रहा है।

ट्रेंचिंग ग्राउंड से पुराने कचरे का खात्मा

ट्रेंचिंग ग्राउंड पर 30-40 साल से 11 लाख टन से ज्यादा पुराना कचरा पहाड़ों की शक्ल में फैला हुआ था। 2017 के अंत से इस कचरे की प्रोसेसिंग वैज्ञानिक तरीके से कर उसे हटाना शुरू किया गया, जो अक्टूबर 2018 में पूरा किया गया। हमारे यहां भानपुर खंती में कचरा निष्पादन का काम शुरू हुआ, लेकिन कचरा निष्पादन में अभी इसमें तीन-चार साल का और समय लगेगा।

डिस्पोजल फ्री मार्केट

2018 में नगर निगम ने डिस्पोजल फ्री मार्केट का प्रयोग शुरू किया। 56 दुकान, सराफा समेत कई प्रमुख बाजारों में खाद्य सामग्रियां स्टील, चीनी मिट्टी के बर्तनों में दी जाने लगी। डिस्पोजल प्लेट, गिलास जैसी वस्तुओं का इस्तेमाल बंद हो गया। हमारे यहां प्लास्टिक फ्री के लिए स्पॉट फाइन की कार्रवाई तो हुई पर अभी भी ज्यादातर बाजारों में डिस्पोजल और प्लास्टिक पर बैन नहीं लग पाया।

आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन

इंदौर ने घरों-बाजारों से कचरा लेकर उसे ट्रेंचिंग ग्राउंड तक पहुंचाने के लिए शहर में 12 जगह आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन स्थापित किए। वहां घरों से कचरा लाकर मशीनों से सीधे ट्रेंचिंग ग्राउंड भेजा जाता है। हमारे यहां तीन ही कचरा ट्रांसफर स्टेशन बन पाए। बाकी जगह प्रस्तावित हैं।

मशीनों से शहर की सफाई

नगर निगम ने 2017 से शहर की मुख्य सड़कों की सफाई मशीनों से रात में शुरू की। जिससे शहर में उड़ने वाली धूल पर काफी हद तक नियंत्रण हो गया। हमारे यहां स्मार्ट सिटी कंपनी द्वारा मशीने तो लाई गईं, लेकिन सर्वेक्षण के बाद उतारा गया।

सीएंडडी प्लांट की स्थापना

शहर से रोज निकलने वाले सैकड़ों टन मलबे के निपटान के लिए निगम ने कंस्ट्रक्शन एंड डेमोलिशन (सीएंडडी) वेस्ट प्लांट लगायाा। जहां शहरभर का मलबा लाकर उससे पेवर ब्लॉक और ईंट आदि बनाए जाने लगे। प्लांट की क्षमता 100 टन प्रतिदिन की है। हमारे यहां एमआरएफ सेंटर चालू किया गया, जिसमें धातुओं को अलग किया जाता है, लेकिन सीएंडडी वेस्ट प्लांट नहीं है।

समझ से परे है

प्रदेश के दूसरे छोटे-बड़े शहरों से बेहतर तैयारी थी। पैरामीटर्स में बेहतर अंक भी मिले। लेकिन स्टार रेटिंग में सेकंड स्टार समझ से परे है। क्योंकि यदि ऐसा होता तो दूसरे पैरामीटर्स में नंबर नहीं मिलते। इस पर उचित फोरम में बात रखी जाएगी- बी विजय दत्ता, आयुक्त नगर निगम

केंद्रीय मंत्री को लिखेंगे पत्र

स्टार रेटिंग की रैंकिंग में तैयारी के बावजूद जिस तरह कम अंक दिए गए हैं, इससे हमारी छवि गिरी है। इसकी स्वतंत्र एजेंसी से जांच होना चाहिए। इसको लेकर हम आवास एवं शहरी कार्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिख रहे हैं। कहीं न कहीं चूक हुई है। इसे यदि नहीं सुधारा गया तो सर्वेक्षण में मेहनत करने वाले स्वच्छता सेवकों का मनोबल टूटेगा- आलोक शर्मा, महापौर

Source:Agency

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