पांच बार कृषि कर्मण अवार्ड हमारे कारण पर हम धरने पर क्यों ?

?पांच बार कृषि कर्मण अवार्ड हमारे कारण पर हम धरने पर क्यों ?

सहकारी आंदोलन
 नरसिंहपुर जिला अब धरना व आंदोलनों के लिये पहचाना जायेगा, लगातार कई महिनों से जिलें में आंदोलन हो रहे हैं, सरकार व जिला प्रशासन की नींदे उडाकर रख दी हैं, आंदोलनों ने. अभी किसान आंदोलन खत्म ही हुआ है, और शुरू हो गया सहकारी आंदोलन.
   जी हां अब बात कर रहे हैं म. प्र. सहकारी संस्थाओं की जिनके कर्मचारी नरसिंहपुर जनपद मैदान में अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठ गये हैं, जिनका कहना है कि समिति के कर्मचारीयों द्वारा केन्द्र व राज्य शासन की कई महत्वपूर्ण योजनाओं को सफलतापूर्वक संचालन किया जा रहा है, जैसे किसानों को 0% ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध करवाना, रासायनिक खाद्य, बीज, दवाईयो तथा, कृर्षि यंत्र, समर्थन मूल्य पर गेंहू व धान खरीदी, भावान्तर पंजीयन योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, मध्यान्ह भोजन, सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत शासकीय उचित मूल्य दुकानों का सफलतापूर्वक संचालन कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा है, जिसके कारण ही मध्यप्रदेश शासन को पॉंचवीं बार कृर्षि कर्मण पुरूषकार प्राप्त हुआ है, परन्तु समिति कर्मचारियों की महत्वपूर्ण मांगों के संदर्भ में अनेको ज्ञापन दिये गये जिस पर आज तक निराकरण नहीं हो पाया, समितियों के कर्मचारियों को राज्य शासन द्वारा किसी भी प्रकार का कोई लाभ कर्मचारियों को नहीं मिला है जिसके कारण कर्मचारियों में भारी असंतोष हो रहा है.
*✍?जिनकी मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:-*
?? प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्थाओं में पदस्थ समस्त कर्मचारियों का वेतनमान लागू किया जावें. 
?? समस्त कर्मचारियों का जिला केडर, स्थानांतरण लागू किया जाये. 
?? संस्थाओं में कार्यरत कम्प्युटर आपरेटरों को सेवा नियम में लिया जावे, तथा सेवा निवृत्त की आयु 62 वर्ष की जावें , शासकीय उचित मूल्य दुकानों को समूह में देने का निर्णय वापस कर दुकानों को समितियों को दी जावें एवं समितियों में भुगतान क्षमता के मापदंड को पूर्णत: समाप्त कर कर्मचारियों को राज्य शासन के कर्मचारियों का दर्जा दिया जावें,
*?शासन द्वारा मांगे नहीं मानने पर आंदोलन को महाआंदोलन का स्वरूप दिया जायेगा
जिसमें मुणडन संस्कार, क्रमिक भूख हडताल, आमरण अनशन आदि समय समय पर महासंघ के निर्देशानुसार किया जायेगा.