हनुमानजी से सोने और जागने का सही अर्थ जानिये – राजेष्वरानंदजी

हनुमानजी से सोने और जागने का सही अर्थ जानिये – राजेष्वरानंदजी

 

भोपाल। तुलसी मानस प्रतिष्ठान के प्रतिष्ठा कार्यक्रम गोरेलाल षुक्ल स्मृति समारोह के अंतर्गत अपेन प्रवचन में स्वामी राजेष्वरानंदजी ने कहा कि जागने का सही अर्थ यह है कि हम (मोह) अज्ञान के प्रभाव में न आएं। और ज्ञान के प्रभाव से जाग जाएं। आपने कहा कि जीवन व्यवहार मे तो व्यक्ति रात्रि में नीद के प्रभाव से सोने चला जाता है और प्रातः जाग जाता है। किन्तु अज्ञान का प्रभाव तो व्यक्ति को सदैव ही विषय विकारों में सुला देता है। अतः समय रहते सावधान होना बहुत आवष्यक है। आपने व्यंग्य में कहा कि लंका सोने की नगरी है तो इस अर्थ मे वहां सब सोने वाले ही हनुमानजी को दिखाई दिये। हनुमानजी ने पूरी लंका में पहचान कर केवल विभीषण को ही जगाया। और उन्हंे जगाकर रामकथा सुनाई। इसके प्रभाव से ही वे भगवान श्रीराम की कृपा दृष्टि प्राप्त कर सके। आपने कहा कि वैसे तो छह महीने सोने वाले कुंभकर्ण को रावण भी जगाता है किन्तु रावण के कुंसग से न केवल कुंभकर्ण का बल्कि रावण सहित लंका के राक्षसों का विनाष होता है अतः ज्ञान भक्ति के प्रकाष से अंतकरण के अंधकार को दूर कर हमें स्वयं तथा संसार के कल्याण हेतु लग जाना चाहिये यही हनुमानजी के चरित्र से षिक्षा मिलती है।
कार्यक्रम के षुभारंभ में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व सांसद श्री रघुनंदनजीषर्मा ने कि रामचरितमानस के सभी पात्र समाज की नीति निर्धारण की षिक्षा देते है। इसके पीछे मानस रचनाकार गोस्वामी तुलसीदासजी की नीति मर्मज्ञता ही है जो उनके विचारों के माध्यम से हमारे सामने आयी है। आपने कहा कि सत्संग से भीतर और बाहर का अंधकार दूर होता है हनुमानजी का चरित्र हम सबके लिये अनुकरणीय है।
समारोह का षुभारंभ में पंडित गोरेलाल षुक्ल एवं गोस्वामी तुलसीदासजी के चित्र पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्जवलन किया गया।
इस अवसर पर महाराजश्री के स्वागत करने वालों में श्री रघुनंदन षर्मा ,श्री एन.एल.खंडेलवाल,श्री पी.डी.मिश्र,श्री यू.एसवर्मा, श्री अषोक जैन भाभा,श्री राजेष वर्मा,श्री निलिम्प त्रिपाठी,श्रीमती सुषीला षुक्ला, श्री अषोक मिश्रा श्री कमलेष जैमिनी,श्री जवाहर सिंह,श्री महेन्द्र निगम प्रमुख थे।
प्रवचन प्रतिदिन दिनांक 7 दिसंबर 2017 तक संध्या 6.30 बजे से रात्रि 9.00 बजे तक होगें।

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