रातों रात की गई साजिश में पत्रकारों को फँसाने का था प्लान   

रातों रात की गई साजिश में पत्रकारों को फँसाने का था प्लान

  

जितेंद्र शर्मा / मुम्बई
 नालासोपारा । महाराष्ट्र के पालघर जिले के तेज तर्रार पुलिस अधीक्षक मंजूनाथ सिंगे के जिले कि कमान संभालने के बाद एक ओर जहाँ सुशासन की स्थापना के लिए सोशल मीडिया द्वारा जनता तक सीधे पहुंच बनाने के लिए सोशल मीडिया के  विभिन्न  आयामों ,फेसबुक ,व्हाटसअप  तथा ट्विटर पर अपनी उपस्थित दर्ज कराते हुए जनता तक सीधे पहुंचने के माध्यम जोड़े गए हैं। वहीं उन्हीं के विभाग के कुछ लोग अपने निजी फायदे के लिए  उनकी मुहिम को कमजोर करने में लगे हैं।
 तुलिंज पुलिस स्टेशन अंतर्गत एक ऐसा मामला प्रकाश में आया है जिसमें पुलिस ने कालाबाजारियों का सहयोग करते हुए , उनसे घूस लेकर आधी रात को पत्रकारों के विरुद्ध आनन फानन में कई  गंभीर मामलों में मामला दर्ज कर दिया ।
मामला 4 नवम्बर का है जिसमें समाचार कवर करने लिए  एक संस्था द्वारा लिखित अनुरोध के बाद  पत्रकार न्यूज़ कवर करने गए थे। जिसमें सत्यम सेल्स आणि सर्विस नाम की दुकान के मालिकानों द्वारा आकांक्षा टॉवर स्थित दुकान के अंदर 25 से ज्यादा सिलिंडर रिफिल किये जा रहे थे। आवासीय बिल्डिंग में चल रहे इस गोरखधंधे की शिकायत सम्बंधित कंपनी ने कई जगहों पर किया था जिनमे से यह संस्था भी शामिल थी जिन्होंने इस पर संज्ञान लेते हुए तुलिंज पुलिस स्टेशन के सीनियर से बात कर मामले में कार्यवाही करने की बात कही थी और कार्यवाही करवाने के लिए वहां 4 नवम्बर की दोपहर लगभग 2 बजे गए।तत्पश्चात पत्रकार भी पहुंचे और मौके पर हो रही कालाबाजारी की घटना कैमरों मे दर्ज कर ली और संबंधित प्रमाण जुटाए और पुलिस को सूचना देने की बात कही।
दुकानदारों ने इस कालाबाजारी में एक संस्था का नाम बताया जो उनके काले कारनामों में भागीदार थी और उनसे सुविधा शुल्क लेकर ऐसे काले धंधे करवाती थी। अपनी आमदनी बंद होने और सुविधा शुल्क लेने के कारण उन्होंने अपना दिमाग लगाया और मामले को पुलिस तक ले गए ।
इस घटना के लगभग 5 दिनों बाद पत्रकारों को इस बात का एहसास हुआ कि मामले में साजिश की जा रही थी और कहीं ना कहीं सच्चाई से हटकर मामले की दिशा बदलने और मामले को उल्टा पत्रकारों पर थोपने की साजिश चल रही थी।
इस बाबत 10 नवम्बर 2017 को पत्रकारों ने तमाम शासनिक ,प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र लिखकर ये बताया कि इस घटना में उनके विरुद्ध साजिश कर उन्हें फँसाये जाने की योजना बनाई जा रही है।
            हुआ वही , जिसकी आशंका जताई गयी थी। 4 नवम्बर की घटना के दस दिनों बाद रात के अंधेरे में साजिशकर्ताओं के दबाव व अपने फायदे के लिए पत्रकारों को बलि का बकरा बनाया गया। जिसमें  उनके विरुद्ध किडनैपिंग , एक्सटॉर्शन ,चीटिंग तथा गोलबंदी कर अपराध करने के मामले दर्ज किए गए।
       साजिशकर्ता उचित मौके की तलाश और अपनी पसंदीदा पुलिस कॉन्स्टेबल की पारी का इंतजार कर रहे थे। रात के वक्त ड्यूटी पर आईं पसंदीदा पुलिसकर्मी को इंचार्ज देखकर खूब मनमानी की गई।  जिसमें कानून और मानकों की अनदेखी कर साजिशकर्ताओं को फायदा पहुंचाने के लिए आधी रात का वक्त चुना गया और पत्रकारों को मनचाहे सेक्शंस में निरुद्ध किया गया।
कहीं पे निगाहें ,कहीं पे निशाना की तर्ज पर दर्ज करवायी गयी FIR की कॉपी साजिशकर्ताओं को दे दी गयी और उक्त कॉपी रातों रात सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया । जिसके लिए उन्होंने बीते 10 दिन दिन रात कड़ी मेहनत की थी।
पीड़ित को दिया जाने वाली FIR कॉपी साजिशकर्ताओं ने अपने कब्जे मे लेकर जी भर के शेयर किया। इस बारे में पत्रकारों ने बताया कि जान-बूझ कर मामले के जाँच की दिशा बदलने और सच्चाई से ध्यान हटाने को लेकर साजिशकर्ताओं ने ऐसा कृत्य किया है।जिसकी जांच की जानी चाहिए। उन्होंने ने इस कृत्य के कारण अपनी जान का खतरा बताया है  और उन्होंने इसके लिए पुलिस के उच्चाधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और उन्हें सुरक्षा मुहैया कराने की माँग की है।
इस बाबत पत्रकारों ने उच्चाधिकारियों को लिखे पत्र मे सवाल उठाया है कि सत्यम सेल्स आणि सर्विस नामक दुकान चला रहे दोनों चचेरे भाई जिन्होंने अपने निजी फायदे के लिए वहां रह रहे परिवारों के जान की परवाह ना करते हुए गैस की अवैध और असुरक्षित तरीके से रिफिलिंग कर उसको आसपास रह रहे नाइजीरियन ,अफ्रीकन जैसे लोगों को ऊँचे दामों में बेचा जाता था। जो गैस कनेक्शन लेने की पात्रता पूरी नहीं कर पाते थे उनको गैस के रिफिल किये हुए बॉटल उपलब्ध करवाए जाते थे। यह बात दुकानदारों ने स्वयम मीडिया को बताया और कहा कि इस बारे में उनकी मददगार एक NGO है।जिसके नाम का खुलासा प्रमाण के साथ कोर्ट को दिया जाएगा।
मामले की संजीदगी से बेपरवाह और अपनी जेब गर्म करने के बाद खुश इंचार्ज पुलिसकर्मी ने बिना जाँच किये ही मामले को साजिशकर्ताओं के मनमाफिक रूप दिया और पत्रकारों को दिए गए IPC सेक्शन में निरुद्ध कर दिया।
इस मामले में पत्रकारों ने तुलिंज पुलिस के उस पुलिसकर्मी से सवालों के जवाब मांगें हैं जिन्होंने यह मामला दर्ज किया है।
पत्रकारों का कहना है कि लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ कहे जाने वाले पत्रकारिता जगत से जुड़े पत्रकारों ने समय-समय पर बड़े से बड़ा घोटाला ,भ्रष्टाचार और कई संगीन मामले उजागर करते आये हैं। इसलिए मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहा गया है लेकिन पालघर जिले के नालासोपारा तुलिंज पुलिस स्टेशन ने भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हुए  कालाबाजारियों से पैसे लेकर मामले की स्टिंग करने , लाइव कवरेज करने गए पत्रकारों पर बिना सबूत , तथ्यों की अनदेखी करते हुए अपहरण , धोखाधड़ी तथा प्रताड़ना जैसे गम्भीर मामले दर्ज किए हैं जिसकी जांच होनी चाहिए।
सीसीटीवी के सामने खड़े रिपोर्टर्स को किडनैपर बताने वाली पुलिस ने बाकी पहलुओं को उजागर ना करते हुए सिर्फ आईपीसी लगाने में व्यस्त रही। क्योंकि उनको यकीन था कि थर्ड डिग्री इस्तेमाल कर वो पत्रकारों को किडनैपर बना देंगे और दो चार मामले और थोप कर वाहवाही लूटी लेंगे।
अपने पुलिसिया रुआब में मस्त और पैसे की खनक के आगे कानून को अपनी विरासत समझ मनमाने तरीके से रात भर मामला थोपा गया ।
        उन्होंने समाज के बारे मे यह नहीं सोचा कि आवासीय बिल्डिंग में हो रहे कालाबाजारी की वजह से अगर एक भी सिलिंडर फूटता तो पालघर जिले की क्या हालत होती। हैं मौजूद 25 से ज्यादा सिलेंडर बिना सील और मुहर के मौजूद थे जो कभी भी दुर्घटना का कारण बन सकते थे।
ज्ञात हो कि तुलिंज पुलिस स्टेशन में पत्रकारों के खिलाफ  सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए हैं । सूत्रों की माने तो तुलिंज पुलिस स्टेशन के ज्यादातर अधिकारियों के तबादले भ्रष्टाचार में लिप्त होने के कारण हुए हैं।
पत्रकारों के मामले मे जिस तरह के घटनाक्रम सामने आए हैं उससे तुलिंज पुलिस स्टेशन में व्याप्त भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है और साथ ही साथ यह भी बात साफ हो गयी है कि उक्त पुलिस स्टेशन मे अपराधियों की ही चलती है।
लोगों को कहते हुए सुना जा रहा है कि जब तुलिंज पुलिस स्टेशन में ऐसा हाल मीडिया के लोगों का हो रहा है तो आम जनता के साथ क्या किया जाता होगा ?
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