दिमाग की क्षमता बढ़ाना चाहते हैं तो बदल डालें अपनी ये आदतें

दिमाग की क्षमता बढ़ाना चाहते हैं तो बदल डालें अपनी ये आदतें

दिमाग की हमारे शरीर में कितनी अहमियत है यह बताने की जरूरत नहीं। शरीर की हर क्रिया का संचालन दिमाग के बिना संभव नहीं है। सांस लेना, मसल्स कंट्रोल, सोचना, समझना, याद रखना, हार्मोंन्स का नियंत्रण आदि सभी कार्यों का संचालन मस्तिष्क से ही होता है। इसलिए हमारे भोजन का अधिकांश हिस्सा दिमाग के पोषण के लिए चला जाता है। दिमाग से कमजोर व्यक्ति समाज में काफी उपेक्षित होता है इसलिए हर कोई अपने दिमाग की क्षमता बढ़ाने के प्रयास में लगा रहता है। हमारे दैनिक जीवन की बहुत सी आदतें ऐसी होती हैं जो हमारे दिमाग की क्षमता पर असर डालती हैं। अगर हम समय रहते उन आदतों को बदल लें तो हमारा दिमाग और बेहतर तरीके से काम कर सकता है। आइए, जानते हैं कि ऐसी कौन सी आदते हैं जिन्हें आपको अपने मस्तिष्क की बेहतरी के लिए बदल लेना जरूरी है।

1. सोने में कोताही न करें – वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन द्वारा किए गए एक शोध में यह कहा गया है कि जब हम सोते हैं तब हमारा दिमाग अपने यहां एकत्रित सभी विषाक्त पदार्थों बाहर निकालकर खुद को साफ करता रहता है। ऐसे में अगर हम कम सोते हैं तो उत्सर्जन की यह प्रक्रिया अधूरी रह जाती है। ऐसे में ये विषाक्त पदार्थ दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होती रहती हैं और हमारा दिमाग अस्वस्थ हो जाता है। ऐसे में याद्दाश्त कमजोर होने जैसी समस्याए सामने आती हैं।

2. मत करें धूम्रपान – धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों के दिमाक की संज्ञानात्मक क्षमता बहुत कम होती है, ऐसा कई अध्ययनों से साबित हो चुका है। इसके अलावा धूम्रपान करने से याद्दाश्त होने, सीखनें – समझने की क्षमता में कमी होने की शिकायतें सामने आती हैं। धूम्रपान से डिमेटिया और अल्जाइमर का भी काफी खतरा होता है।

3. बहुत कम न बोलें – विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक अध्ययन के मुताबिक जो लोग कम बातें करते हैं उनमें ब्रेन डैमेज का काफी खतरा होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि कम बोलने या सोचने से दिमाग की कोशिकाएं निष्क्रिय होकर सिकुड़ने लगती हैं। वहीं जब हम बातें करते हैं तब कोशिकाएं सक्रिय रहती हैं और उनकी कार्यक्षमता बढ़ती है। सोचना हमारे दिमाग के लिए एक तरह का व्यायाम है।

4. प्रदूषित जगहों से दूर रहें – हमारे दिमाग को अच्छी तरह से काम करने के लिए शरीर के अन्य अंगों की तुलना में दस गुना अधिक ऑक्सीजन चाहिए होता है। वायु प्रदूषण वाली जगहों पर दिमाग को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं हो पाती, जिससे उसकी कार्यक्षमता घटती है। ऐसे में प्रदूषित वायु वाली जगहों से दूरी बनाकर रखें।

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