देश के करोड़ों मोबाइल एडिक्‍टेड लोगों के लिए अच्‍छी खबर, एम्‍स में शुरू हुई यह नई सुविधा

इंटरनेट व ऑनलाइन गेम की लत मानसिक बीमारी का कारण बन रही है। खासतौर पर छात्रों में यह समस्या अधिक देखी जा रही है। इसके मद्देनजर एम्स के बिहेवियरल एडिक्शन क्लीनिक (बीएसी) ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के साथ मिलकर एक डिजिटल पोर्टल तैयार किया है। जिसे बिहेवियर नाम दिया गया है। एम्स के डॉक्टर कहते हैं कि यह पोर्टल लोगों को इंटरनेट के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण होने वाली मानसिक बीमारियों के प्रति जागरूक करने और उसकी रोकथाम में मददगार होगा।

देर रात तक सोशल मीडिया या ऑनलाइन गेम से परेशानी 
दरअसल, सोशल नेटवर्क पर अधिक देर तक व्यस्त रहे, व लंबे समय तक ऑनलाइन गेम खेलने पर कई लोगों में व्यवहारिक परिवर्तन आने लगता है। ऐसे लोग खुद पर नियंत्रण नहीं रख पाते। वे ऑनलाइन गेम या इंटरनेट के मायाजाल में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि जरूरी काम में मन नहीं लगता।

धीरे-धीरे कम होने लगती है सामाजिक सक्रियता
सामाजिक समारोह में जाना कम हो जाता है। इसी तरह छात्रों का पढ़ाई में मन नहीं लगता और व्यवहार में अक्रामकता बढ़ जाती है। यही वजह है कि डब्ल्यूएचओ ने भी गेम एडिक्शन को मानसिक बीमारी मान लिया है। इसे जांच के माध्यम से पता लगाई जाने वाली बीमारियों की सूची में शामिल कर लिया है। एम्स में पिछले कुछ सालों से बिहेवियरल एडिक्शन क्लीनिक भी चलता रहा है। जहां इंटरनेट व ऑनलाइन गेम की बीमारियों की चपेट में आए लोगों का इलाज होता है।

नया पोर्टल हुआ लांच
इस क्रम में अब यह नया पोर्टल शुरू किया गया है। बिहेवियरल एडिक्शन क्लीनिक के प्रभारी व एडिशनल प्रोफेसर डॉ. यतन पाल सिंह बलहारा ने कहा कि इस पोर्टल का इस्तेमाल मरीज, परिजन, सामान्य व्यक्ति, शोधार्थी सहित सभी कर सकते हैं।

यह है इसकी खासियत
यह एक ऐसा पोर्टल है, जहां इस उभरती बीमारी की रोकथाम व निदान की पूरी जानकारी ली जा सकती है। इस पोर्टल पर बताया गया है कि गेम एडिक्शन क्या है, इसकी पहचान कैसे की जा सकती है। इसके पहले स्कूलों के शिक्षक व काउंसलरों के लिए एक ऑनलाइन पाठ्यक्रम की शुरुआत की गई थी। उसका इस्तेमाल सामान्य व्यक्ति नहीं कर सकता है, लेकिन नए पोर्टल से हर कोई फायदा उठा सकता है।