खुदकशी की घटनाएं रोकने को जागरूक करेगा डीएमआरसी

 मानसिक व आर्थिक तनाव के कारण आत्महत्या की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। इसके मद्देनजर 10 सितंबर को दुनिया भर में आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया गया, ताकि लोगों को इससे बचाव के प्रति जागरूक किया जा सके। दिल्ली मेट्रो स्टेशनों पर भी आत्महत्या की घटनाएं बढ़ गई हैं। पिछले सप्ताह ही तीन लोगों ने आत्महत्या कर ली। पुराने स्टेशनों पर इन घटनाओं को रोकने के लिए फिलहाल डीएमआरसी को कोई उपाय नहीं सूझ रहा है। इसलिए डीएमआरसी ने लोगों को जागरूक करने की सोची है। इस क्रम में सोशल मीडिया को माध्यम बनाकर जागरूकता अभियान शुरू किया गया है।

मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के प्रति किया अगाह

मंगलवार को पटेल चौक मेट्रो स्टेशन स्थित मेट्रो संग्रहालय में एक बड़ा पैनल लगाया गया, जिस पर लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति आगाह करते हुए कभी न हार मानने की अपील की गई है। इसका मकसद लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना है। यह पैनल एक माह तक मेट्रो संग्रहालय में रहेगा।

सोशल नेटवर्क पर पोस्‍ट से जागरुकता की पहल

डीएमआरसी ने सोशल नेटवर्क पर भी कई पोस्ट किए हैं। इसके अलावा फेज तीन के दो नए मेट्रो कॉरिडोर (पिंक व मजेंटा लाइन) के स्टेशनों के प्लेटफॉर्म पर स्क्रीन डोर लगाए गए हैं। डीएमआरसी ने पुराने स्टेशनों पर भी स्क्रीन डोर लगाने की योजना बनाई थी। इसके तहत येलो लाइन के सबसे व्यस्त छह स्टेशनों पर भी स्क्रीन डोर लगाए गए हैं।

स्‍क्रीन डोर से लगाने में लगता है काफी समय

इनमें केंद्रीय सचिवालय, राजीव चौक, नई दिल्ली, चावड़ी बाजार, चांदनी चौक व कश्मीरी गेट शामिल हैं, लेकिन इन स्टेशनों पर स्क्रीन डोर लगाने में डीएमआरसी को काफी लंबा वक्त लगा। क्योंकि मेट्रो के परिचालन के दौरान स्क्रीन डोर लगाने का काम नहीं हो पाता। साथ ही तकनीकी रूप से पुराने स्टेशनों पर इसे लगाना आसान नहीं है। इस वजह से फिलहाल किसी पुराने स्टेशन पर इसे लगाने की योजना नहीं है। मौजूदा समय में दिल्ली मेट्रो के 250 स्टेशनों में से 75 स्टेशनों पर स्क्रीन डोर लगे हैं। शेष 175 स्टेशनों पर स्क्रीन डोर नहीं हैं। इनमें से कुछ स्टेशनों के प्लेटफॉर्म पर स्टील के रेलिंग लगाए गए हैं, लेकिन ये उपाय ज्यादा कारगर नहीं है।

स्‍टेशन आत्‍महत्‍या की

इसलिए जिन स्टेशनों पर स्क्रीन डोर नहीं हैं, वे स्टेशन आत्महत्या की घटनाओं के लिए संवेदनशील बने हुए हैं। डीएमआरसी सूत्रों के अनुसार इस साल के शुरुआती तीन माह में विभिन्न मेट्रो स्टेशनों पर आत्महत्या की करीब 22 घटनाएं हुईं। इसके बाद घटनाएं थोड़ी कम हुईं, लेकिन कुछ समय से एक बार फिर घटनाएं बढ़ गई हैं। अगस्त में तीन घटनाएं हुई थीं। इसके बाद इस माह के पहले सप्ताह में तीन घटनाएं हो चुकी हैं। डीएमआरसी के अनुसार इन घटनाओं से डीएमआरसी भी चिंतित है। इसलिए विभाग में इस पर मंथन चल रहा है कि ये घटनाएं कैसे रोकी जाएं।

 मानसिक व आर्थिक तनाव के कारण आत्महत्या की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। इसके मद्देनजर 10 सितंबर को दुनिया भर में आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया गया, ताकि लोगों को इससे बचाव के प्रति जागरूक किया जा सके। दिल्ली मेट्रो स्टेशनों पर भी आत्महत्या की घटनाएं बढ़ गई हैं। पिछले सप्ताह ही तीन लोगों ने आत्महत्या कर ली। पुराने स्टेशनों पर इन घटनाओं को रोकने के लिए फिलहाल डीएमआरसी को कोई उपाय नहीं सूझ रहा है। इसलिए डीएमआरसी ने लोगों को जागरूक करने की सोची है। इस क्रम में सोशल मीडिया को माध्यम बनाकर जागरूकता अभियान शुरू किया गया है।

मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के प्रति किया अगाह

मंगलवार को पटेल चौक मेट्रो स्टेशन स्थित मेट्रो संग्रहालय में एक बड़ा पैनल लगाया गया, जिस पर लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति आगाह करते हुए कभी न हार मानने की अपील की गई है। इसका मकसद लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना है। यह पैनल एक माह तक मेट्रो संग्रहालय में रहेगा।

सोशल नेटवर्क पर पोस्‍ट से जागरुकता की पहल

डीएमआरसी ने सोशल नेटवर्क पर भी कई पोस्ट किए हैं। इसके अलावा फेज तीन के दो नए मेट्रो कॉरिडोर (पिंक व मजेंटा लाइन) के स्टेशनों के प्लेटफॉर्म पर स्क्रीन डोर लगाए गए हैं। डीएमआरसी ने पुराने स्टेशनों पर भी स्क्रीन डोर लगाने की योजना बनाई थी। इसके तहत येलो लाइन के सबसे व्यस्त छह स्टेशनों पर भी स्क्रीन डोर लगाए गए हैं।

स्‍क्रीन डोर से लगाने में लगता है काफी समय

इनमें केंद्रीय सचिवालय, राजीव चौक, नई दिल्ली, चावड़ी बाजार, चांदनी चौक व कश्मीरी गेट शामिल हैं, लेकिन इन स्टेशनों पर स्क्रीन डोर लगाने में डीएमआरसी को काफी लंबा वक्त लगा। क्योंकि मेट्रो के परिचालन के दौरान स्क्रीन डोर लगाने का काम नहीं हो पाता। साथ ही तकनीकी रूप से पुराने स्टेशनों पर इसे लगाना आसान नहीं है। इस वजह से फिलहाल किसी पुराने स्टेशन पर इसे लगाने की योजना नहीं है। मौजूदा समय में दिल्ली मेट्रो के 250 स्टेशनों में से 75 स्टेशनों पर स्क्रीन डोर लगे हैं। शेष 175 स्टेशनों पर स्क्रीन डोर नहीं हैं। इनमें से कुछ स्टेशनों के प्लेटफॉर्म पर स्टील के रेलिंग लगाए गए हैं, लेकिन ये उपाय ज्यादा कारगर नहीं है।

स्‍टेशन आत्‍महत्‍या की

इसलिए जिन स्टेशनों पर स्क्रीन डोर नहीं हैं, वे स्टेशन आत्महत्या की घटनाओं के लिए संवेदनशील बने हुए हैं। डीएमआरसी सूत्रों के अनुसार इस साल के शुरुआती तीन माह में विभिन्न मेट्रो स्टेशनों पर आत्महत्या की करीब 22 घटनाएं हुईं। इसके बाद घटनाएं थोड़ी कम हुईं, लेकिन कुछ समय से एक बार फिर घटनाएं बढ़ गई हैं। अगस्त में तीन घटनाएं हुई थीं। इसके बाद इस माह के पहले सप्ताह में तीन घटनाएं हो चुकी हैं। डीएमआरसी के अनुसार इन घटनाओं से डीएमआरसी भी चिंतित है। इसलिए विभाग में इस पर मंथन चल रहा है कि ये घटनाएं कैसे रोकी जाएं।