नए कानून का दिख रहा डर, 10 दिन में बने चार लाख प्रदूषण प्रमाण पत्र

 यातायात नियमों का उल्लंघन किए जाने पर एक सितंबर से जुर्माने की धनराशि कई गुना बढ़ने के बाद वाहन चालकों की लाइन पेट्रोल पंप पर बने प्रदूषण जांच केंद्र से खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। हालत यह है कि बीते दस दिन में करीब चार लाख वाहनों को प्रदूषण प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं। वहीं अब भी प्रदूषण जांच केंद्रों पर जांच कराने वाले वाहन चालकों की लाइन बरकरार है।

लगातार हो रहा इजाफा
एक सितंबर से लेकर सात सितंबर तक पेट्रोल पंप पर बने प्रदूषण जांच केंद्रों पर जांच कराने वाले वाहनों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है। आठ और दस सितंबर तक रोजाना करीब 50 हजार वाहनों की प्रदूषण जांच की गई है। दस दिनों में सबसे अधिक जांच पेट्रोल से चलने वाले वाहनों की हुई है। इनकी संख्या नौ सितंबर तक तीन लाख से अधिक थी। जबकि दूसरे नंबर पर सीएनजी से चलने वाले वाहन हैं। ऐसे 43 हजार से अधिक वाहनों ने नौ सितंबर तक प्रदूषण जांच कराई है। प्रदूषण जांच कराने वाले 215 वाहन ऐसे भी हैं, जो ईंधन के रूप में एलपीजी का प्रयोग कर रहे हैं।

प्रदूषण की जांच कराने वाले वाहनों की संख्या 50 हजार से कम नहीं
पांच सितंबर के बाद से किसी भी दिन प्रदूषण की जांच कराने वाले वाहनों की संख्या 50 हजार से कम नहीं हुई है। इसके लिए भी लोगों को घंटों लाइन में गुजारने पड़े हैं। मंगलवार को हालत यह रही कि कई प्रदूषण जांच केंद्रों पर लोग अपने दोपहिया वाहन खड़े करके चले गए। वहीं केंद्र पर तैनात कर्मचारी को चाबी भी दे गए और यह भी कह गए कि जब प्रदूषण की जांच हो जाए, तो फोन करके बता दें। सुबह के समय प्रदूषण जांच केंद्र खुलने से पहले ही वाहन वहां खड़े हो रहे हैं। वहीं रात में भी दस बजे तक जांच केंद्रों पर वाहन चालक प्रमाण पत्र लेने के लिए इंतजार कर रहे हैं।

ऑटो एक्‍सपर्ट की राय
वाहनों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए सर्विस सेंटरों पर प्रदूषण जांच की व्यवस्था की जानी चाहिए। यह कोई नई व्यवस्था नहीं होगी, 20 वर्ष पहले भी यह व्यवस्था थी। ऑटो एक्सपर्ट टूटू धवन के मुताबिक सभी प्रकार के वाहनों के अधिकृत सर्विस सेंटरों पर प्रदूषण जांच की व्यवस्था शुरू करने के कई फायदे होंगे। सबसे पहला फायदा यह होगा कि लोगों को पेट्रोल पंप पर इंतजार नहीं करना होगा। दूसरा लाभ यह होगा कि वाहन से अधिक मात्र में धुआं निकलने की वजह को पता करके ठीक किया जा सकेगा। 20 वर्ष पहले अधिकृत सर्विस सेंटरों पर जाने वाले वाहनों के प्रदूषण स्तर की जांच होती थी।