पाकिस्तान मीडिया ने जनता के आगे झूठो की लगाईं कतार ,

भारत और पाकिस्‍तान के बीच जारी तनाव के बीच जम्‍मू-कश्‍मीर के मसले पर शुक्रवार को हुई संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्‍थाई सदस्‍य देशों के प्रतिनिधियों की बैठक हुई। स्‍थाई सदस्‍य देश चीन की मांग पर बुलाई गई इस बैठक से पाकिस्‍तान ने काफी उम्‍मीदें लगा रखी थीं लेकिन वे चूर चूर हो गईं। इस बैठक में भारत और पाकिस्‍तान के बीच जारी तनाव को लेकर चिंता जताते हुए दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की गई। हालांकि, पाकिस्‍तान इस बैठक को अपनी जीत बता रहा है। पाकिस्‍तानी अखबार अपने मुल्‍क की जनता के सामने झूठ परोसने में लगे हुए हैं ताकि देश के हुक्‍मरानों की इज्‍जत नीलाम होने से बच सके।
पाकिस्‍तानी अखबार डॉन ने अपने मुल्‍क की जनता को खुश करने की कवायद के तहत लिखा है कि साल 1965 के बाद से पहली बार ऐसा हुआ है कि संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद ने जम्‍मू-कश्‍मीर के मसले पर बैठक की। डॉन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सुरक्षा परिषद ने कथित तौर पर भारत के उस दावे को अमान्‍य कर दिया कि जम्‍मू-कश्‍मीर पर हालिया फैसला उसका आंतरिक मामला है। हालांकि, सच्‍चाई यह है कि संयुक्‍त राष्‍ट्र में भारत के स्‍थाई प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने साफ कर दिया था कि जम्‍मू-कश्‍मीर भारत का अभिन्‍न अंग है और वहां का मसला भारत का अंदरूनी मामला है।
बैठक बुलाने को लेकर ठोंकी पीठ
पाकिस्‍तानी अखबार द नेशन ने अपनी रिपोर्ट में मलीहा लोधी के हवाले से लिखा है कि सुरक्षा परिषद के सदस्‍य देशों ने 72 घंटे के भीतर ही पाकिस्‍तान की आवाज सुनी और सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाकर भारत की कोशिशों को झटका दिया है। द एक्‍सप्रेस ट्रिब्‍यून ने भी मलीहा लोधी के बयान को ही लीड स्‍टोरी के रूप में रखा है। अखबार ने लिखा है कि सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाया जाना ही इस बात का सुबूत है कि कश्मीर भारत का आंतरिक नहीं है, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा है। मलीहा लोधी ने कल कहा था कि भारत ने इस बैठक के न होने को लेकर काफी कोशिशें की थी लेकिन हम इसे लेकर सुरक्षा परिषद के सदस्‍य देशों को मनाने में सफल रहे।