नए कोर्स बचा सकते हैं बंदी की कगार पर पहुंचे तकनीकी कॉलेजों को

नए कोर्स बचा सकते हैं बंदी की कगार पर पहुंचे तकनीकी कॉलेजों को

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ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) ने हाल ही में कम एडमिशन दर वाले 800 तकनीकी कॉलेजों को बंद करने का फैसला किया है। लेकिन, इस फैसले से विशेषज्ञ और शिक्षाविद सहमत नहीं हैं। उनके अनुसार यह कम एडमिशन रेट की समस्या का सही समाधान नहीं है। कॉलेजों को बंद करने पर उसका इंफ्रास्ट्रक्चर बेकार हो जाएगा। इसलिए शिक्षाविदों ने एआईसीटीई को इन कॉलेजों में दूसरे स्ट्रीम में प्रोफेशनल कोर्स शुरू करने, वोकेशनल कोर्स कराने, ऑनलाइन स्टडी प्रोग्राम चलाने और कॉलेजों का विलय करने जैसे सुझाव दिए हैं। अब एआईसीटीई इन सभी विकल्पों के कानूनी पहलुओं पर गौर कर रही है।
बेकार हो जाएगा इंफ्रास्ट्रक्चर
शिक्षाविदों के अनुसार कॉलेजों को बंद करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। इरोड क्षेत्र में कुछ कॉलेजों ने इंजीनियरिंग कोर्स को बंद कर पारा मेडिकल कोर्स शुरू किए हैं। वहीं, इस इलाके में कुछ महिला कॉलेजों पुराने कोर्स बंद कर मेडिकल कॉलेज खोलने की तैयारी कर रहे हैं। ज्यादातर प्राइवेट शैक्षणिक संस्थान किसी ट्रस्ट द्वारा चलाए जाते हैं। ऐसे में कॉलेज बंद करने पर उसका इंफ्रास्ट्रक्चर बेकार हो जाएगा क्योंकि इनका इस्तेमाल किसी व्यापार या उद्योग जैसे लाभ वाले कार्यों मेँ नहीं किया जा सकता। इस इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल कोई कॉलेज या अस्पताल खोलने के लिए ही किया जा सकता है। साथ ही पुराने कॉलेजों की जगह इन्हीं जगहों पर नया कॉलेज खोलने के लिए ज्यादा निवेश की जरूरत नहीं पड़ेगी।
कॉलेजों के विलय पर भी विचार
नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 1986 के तहत दो कॉलेजों का भौगोलिक स्थिति के अनुसार विलय किया जा सकता है। इसलिए कुछ संस्थानों से एआईसीटीई से कॉलेजों के विलय पर भी विचार करने को कहा है। शास्त्र यूनिवर्सिटी के डीन एस वैद्यसुब्रमण्यम के अनुसार दो कॉलेजों के विलय के बाद दोनों एक-दूसरे की लैब और फैकल्टी का लाभ ले सकते हैं। हालांकि, कॉलेजों को विलय के लिए एआईसीटीई को नए नियम बनाने होंगे ताकि संस्थानों की गुणवत्ता को बरकरार रखा जा सके।
ऑनलाइन डिग्री पर नजर
इन कॉलेजों में ऑनलाइन कोर्स चलाने का भी सुझाव एआईसीटीई को दिया गया है। वैद्यसुब्रमाण्यम के अनुसार ऑनलाइन डिग्री उच्च शिक्षा का भविष्य है। ऐसे में इन कॉलेजों द्वारा शुरू किए गए ऑनलाइन डिग्री के लिए थ्योरी क्लासेस ऑनलाइन क्लासरूम के माध्यम से दिए जा सकते हैं और प्रैक्टिकल सेशन के लिए कॉलेज का इस्तेमाल किया जा सकता है। फिलहाल एआईसीटीई संस्थानों द्वारा दिए गए सभी सुझावों पर विचार कर उसके कानूनी पहलुओं पर चर्चा कर रही है।

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