शिवराज के नाम पर मिशन 2018 लड़ाए जाने पर संघ का ऐतराज़ ।

मिशन-२०१८ शिवराज के नाम पर लड़ाए जाने पर संघ को ‘एतराज

अवधेश पुरोहित भोपाल। । मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सत्ता पर काबिज होने के बाद जहाँ आये दिन किसी न किसी मुद्दों को लेकर हो रहे उपचुनाव और लोकसभा व विधानसभा चुनावों से लेकर नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव में लगातार विजय हासिल करने की बजाए शिवराज को एकमात्र जिताऊ नेता माना जा रहा था, हर चुनाव परिणामों से यह बात साबित होती जा रही थी कि राज्य में एकमात्र जिताऊ नेता वाली छवि केवल शिवराज की ही है न कि संघ और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की और इसी भ्रम के चलते शिवराज सिंह भाजपा और संघ पर हावी होने का अहसास शायद संघ और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने भांपते हुए अब मिशन-२०१८ का चुनाव शिवराज के नाम पर न लड़े जाने की बजाए भाजपा और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के नाम पर चुनाव लडऩे की रणनीति बनाई है और इसके लिये जो रणनीति संघ और भाजपा ने तैयार की है उसके चलते अब प्रदेश में शिवराज के राजनीतिक गुरु स्वर्गीय सुंदरलाल पटवा के शासनकाल में उनकी मनमानी के चलते जिस तरह से वर्ष २००३ से पहले पार्टी के अधिकांश कार्यकर्ता रुष्ट होकर घर बैठ गए थे और उस समय उमा भारती को इन कार्यकर्ताओं को मनाने में काफी दिक्कतें आई थीं उतनी मेहनत उन्हें दिग्विजय सिंह के कथित कुशासन से इस प्रदेश की जनता को मुक्ति दिलाने के लिये नहीं करनी पड़ी थी, ठीक यही स्थिति मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सत्ता पर काबिज होने के बाद राज्य में बनी और शिवराज सिंह सत्ता और संगठन में अपने आपको सर्वोसर्वा मानकर चलने लगे जिसके चलते पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शिवराज की इस नीति से असंतुष्ट होकर घर बैठ गए और उनकी जगह सत्ता के दलाल और भजकलदारम् की दम पर अन्य पार्टी से आये नेता और कार्यकर्ता पार्टी में हावी तो हो गए तो वहीं अपनी पैसे की खनक के चलते उन्होंने शिवराज मंत्रीमण्डल में जगह भी पा ली, सत्ता और संगठन में शिवराज की वनमैन शो की स्थिति यह रही कि इस दौरान जो भी संगठन का मुखिया रहा वह शिवराज सिंह की हाँ में हाँ करता रहा और जिसने नहीं की तो उनका हाल प्रभात झा की तरह पोखरण विस्फोट की स्थिति बनी। लेकिन इन सब परिस्थितियों को समझते हुए भाजपा और संघ के नेता इस प्रदेश की भाजपा के सत्ता और संगठन को शिवराज के आभामण्डल से दूर करने की रणनीति बनाने में लग गये और संघ और इन नेताओं ने मिलकर तय किया है कि मिशन-२०१८ का चुनाव शिवराज के नाम पर नहीं बल्कि भाजपा के नाम पर लड़ा जाये और इसके लिये प्रदेश में शिवराज की रणनीतियों के चलते जो भाजपा कार्यकर्ता घर बैठ चुके हैं उन कार्यकर्ताओं को फिर से सक्रिय करने की रणनीति संघ के साथ-साथ भाजपा संगठन ने अमल कर ना शुय कर दिया है। अब संगठन ने यह रणनीति बनाई है कि मिशन-२०१८ के चुनाव से पहले संगठन को इतना मजबूत और सक्रिय कर दिया जाए कि चुनाव जीतने के लिये उसे शिवराज सिंह की छवि के लिये मोहताज न बनना पड़े। अक्टूबर में होने वाली आरएसएस की कार्यकारिणी मण्डल की बैठक में इस विषय पर चर्चा होगी लेकिन यह खेल को गुपचुप तरीके से अंजाम दिया जाएगा, संघ और भाजपा के नेताओं ने जो रणनीति तैयार की है उसके अनुसार एक बार फिर पुराने नेताओं का सक्रिय किया जाएगा, जिन नेताओं का नेतृत्व शिवराज के पहले संघ का भगवा ध्वज किया करता था। कुल मिलाकर अब भाजपा और संघ के रणनीतिकार मध्यप्रदेश में शिवराज के आभामण्डल से बाहर निकालने के लिए हर तरह की रणनीति तैयार करने में लग गए हैं जिसके चलते यह तैयारी की जा रही है कि मध्यप्रदेश में २०१८ का चुनाव भाजपा जीते तो मगर इसका श्रेय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को न जाये। साथ ही संघ और भाजपा के नेताओं ने जो रणनीति तैयार की उसके चलते यह भी रणनीति बनाई जा रही है कि शिवराज को दायरे में बनाये रखें न कि उनका आभामण्डल बढऩे दें? यह उल्लेखनीय है कि संघ और भाजपा में अक्सर यह दावा किया जाता है कि कोई भी नेता संगठन से बड़ा नहीं हो सकता, कार्यकर्ता जितना बड़ा होता है कवायद भी उतनी बड़ी करनी होती है। कुल मिलाकर संघ और भाजपा के सूत्रों से छन-छनकर मिल रही खबर से यह बात साफ होती नजर आ रही है कि मिशन-२०१८ का विधानसभा चुनाव में भले ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के कथन के अनुसार शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्रितत्व काल में लड़ा जाए लेकिन इसका श्रेय शिवराज सिंह की झोली में न जाए इस तरह की रणनीति बनाने में प्रदेश में होने वाली २७, २८ और २९ अक्टूबर को भोपाल की आरएसएस की बैठक में बनाई जाएगी और इस बैठक में जहां भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को सक्रिय करने की योजना बनेगी तो वहीं बजरंग दल का राष्ट्रीय अधिवेशन भी इसी दौरान बुलाया गया। कुल मिलाकर इन तीन दिवसीय संघ की बैठक में  भाजपा संगठन को सर्वोपरि बनाये रखने के लिये जमीनी नेताआं और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना है। इसी दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी मौजूद रहेंगे।

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