घरों में जाकर दूध बेचते थे जय प्रकाश, आज अपने दम पर राजनीति में बनाई है पहचान

उत्तरी दिल्ली नगर निगम (North delhi municipal corporation) में जय प्रकाश उर्फ जेपी स्थायी समिति के चेयरमैन होंगे। वर्ष 2017 में चुनकर आए निगम में जय प्रकाश का पहले वर्ष से ही नेता सदन से लेकर स्थायी समिति चेयरमैन बनाए जाने को लेकर नाम चर्चा में रहता था। उन्हें न तो 2017 में मौका मिल पाया और न ही 2018 में।

अब उन्हें स्थायी समिति के चेयरमैन बनने का मौका मिलेगा। 21 जून को होने वाले चुनाव में वे चेयरमैन निर्वाचित हो जाएंगे। जय प्रकाश ने बताया कि परिवार काफी बड़ा था। उस समय घर का गुजारा दूध बेचकर होता था। पांच-छह भैंस थीं। जब वे थोड़े समझदार हो गए तो सदर बाजार के विभिन्न घरों में जाकर दूध बेचते थे।

वे सुबह-शाम दूध बेचकर स्कूल जाते थे। उन्होंने बताया कि वे सात भाई और पांच बहन हैं। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष महापौर बने अवतार सिंह भी जमीनी कार्यकर्ता रहे हैं। उन्होंने कश्मीरी गेट में चाय बेचकर अपने जीवन की शुरुआत की।

व्यवस्था संभालने के लिए जाने जाते हैं जेपी
जेपी ने अपने दम पर राजनीति में पहचान बनाई है। वे संगठन में कार्यक्रमों की व्यवस्था संभालने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने के बाद वर्ष 2004 तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का कार्य किया है। वे संघ की शाखा के गटनायक से लेकर मुख्य शिक्षक और अन्य पदों पर रहे हैं। इसके बाद युवा मोर्चा की प्रदेश इकाई में महामंत्री और राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य भी बने।

जब विजेंद्र गुप्ता अध्यक्ष बने तो उन्हें चांदनी चौक जिले का जिलाध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद विजय गोयल के प्रदेश अध्यक्ष बनने पर वे प्रदेश महामंत्री बन गए। सतीश उपाध्याय के प्रदेश अध्यक्ष बनने के दौरान उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया। मनोज तिवारी के अध्यक्ष बनने के बाद वे प्रदेश उपाध्यक्ष के पद पर कार्य कर रहे हैं। बड़े कार्यक्रमों में अक्सर जय प्रकाश को व्यवस्था की जिम्मेदारी दी जाती है।

लोकसभा चुनाव के दौरान रामलीला मैदान में हुई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में भी वे व्यवस्था की जिम्मेदारी देख रहे थे। इससे पहले जय प्रकाश वर्ष 2008 से 2013 के विधानसभा चुनाव के दौरान सदर बाजार से विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं, लेकिन इस चुनाव में उन्हें कामयाबी नहीं मिली।