529 बार फोन कॉल से होटल दुष्कर्म केस में आया नया मोड़, पढ़िए- HC का यह अहम फैसला

दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने दुष्कर्म के एक मामले में सुनवाई करते हुए आरोपित युवक को इस आधार पर बरी कर दिया कि दुष्कर्म की शिकायत दर्ज कराने से पहले पीड़िता ने आरोपित को 529 बार कॉल किया था। इसके अलावा, महिला ने शिकायत दर्ज कराने में कई हफ्तों का समय लिया था।

न्यायमूर्ति मनमोहन व न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की पीठ ने एक विश्वविद्यालय में महिला प्रोफेसर के बयानों में विरोधाभास के चलते उसे अविश्वनीय करार दिया। पीठ ने यह भी सवाल उठाया कि दुष्कर्म की घटना के एक महीने के बाद महिला ने रिपोर्ट दर्ज क्यों कराई। पीठ ने यह भी पूछा कि पीड़िता ने चिकित्सकीय जांच से इनकार क्यों किया और उसने घटना के बाद आरोपित को 529 बार फोन कॉल क्यों किया?

आरोपित और महिला प्रोफेसर की मुलाकात सोशल नेटवर्किंग साइट के जरिए हुई थी। इसके बाद दोनों के बीच मुलाकात होने लगी थी। इस बीच आरोपित ने उसके साथ दुष्कर्म किया। हालांकि, निचली अदालत ने भी आरोपित को बरी कर दिया था।

हाई कोर्ट में निचली अदालत के फैसले के खिलाफ चुनौती याचिका दायर कर महिला ने कहा कि निचली अदालत ने तथ्यों की अनदेखी की। महिला का आरोप था कि नोएडा स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आइआइएम) से उसे दिसंबर 2016 में सेमिनार में शामिल होने का निमंत्रण मिला था। आरोप है कि आरोपित ने एक होटल में दवाइयां खिलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया था।

वहीं दूसरी तरफ आरोपित ने आइआइएम से सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी को अदालत में पेश करते हुए कहा था कि जिस दिन का हवाला महिला ने अपने शिकायत में दिया है, उस दिन राजपत्रित अवकाश था और कोई सेमिनार नहीं था। महिला ने हाई कोर्ट में कहा कि मर्जी के बगैर संबंध बनाना दुष्कर्म है और आरोपित को इसे गलत साबित करना होगा। वहीं, पीठ ने कहा कि ऐसा तब होता है जब शारीरिक संबंध बना हो और मेडिकल जांच हुई हो, जबकि महिला द्वारा चिकित्सा जांच से इन्कार करने से साफ है कि शारीरिक संबंध नहीं बने।

पीठ ने कहा कि महिला ने दुष्कर्म की शिकायत दर्ज कराने से पहले 16 दिसंबर 2016 से 29 जनवरी 2017 के बीच आरोपित को 529 बार कॉल किया था। पीठ ने यह भी सवाल उठाया कि महिला का होटल के एक कमरे में दुष्कर्म हुआ और उसने न तो इसका विरोध किया और न ही शोर मचाया, जबकि होटल में 24 घंटे सुरक्षा व्यवस्था होती है। इतना ही नहीं घटना के बाद महिला ने आरोपित को उसे शिवाजी स्टेडियम मेट्रो स्टेशन पर छोड़ने की अनुमति दी और दुष्कर्म की शिकायत दर्ज कराने के लिए एक महीने तक इंतजार किया। ऐसे में महिला के आरोपों में विरोधाभास है। आरोपित को इसके लिए सजा नहीं दी सकती।