ग्रामीण यांत्रिकी विभाग के 350 स्टापडेमों में भ्रष्टाचार

ग्रामीण यांत्रिकी विभाग के 350 स्टापडेमों में 90% भ्रष्टाचार

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जिस बुंदेलखंड पैकेज की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तारीफ कर चुके हैं, उसमें भ्रष्टाचार की परतें खुलती जा रही हैं। इसमें हुए भ्रष्टाचार की जांच हाईकोर्ट ने मुख्य तकनीकी परीक्षक से कराई तो चौकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच में बुंदेलखंड के विकास के लिए दिए गए सैंतीस सौ करोड़ की राशि में बड़े पैमाने पर भ्रष्‍टाचार सामने आया है। इसकी शिकायत टीकमगढ़ के सामाजिक कार्यकर्ता पवन घुवारा ने हाईकोर्ट में की थी।

यह 6 जिलों को दी गई थी, जो विभिन्न विभागों में कार्यों के लिए खर्च की गई। ग्रामीण यांत्रिकी विभाग द्वारा बुंदेलखंड पैकेज से 6 जिलों में 350 स्टापडैम बनाए गए। जिसकी प्रशासकीय स्वीकृति राशि एक सौ पैंतीस करोड़ तेरह लाख बाइस हजार की हुई थी। केंद्र सरकार ने ग्रामीण यांत्रिकी विभाग को दो सौ दस करोड़ की राशि स्वीकृत की थी।

उक्त 350 स्टापडेमों की मुख्य तकनीकी परीक्षक द्वारा रेंडम के आधार पर जो जांच की गई। उस जांच प्रतिवेदन में खुलासा किया गया है कि विशेष स्टापडेमों की विस्तृत जांच के बाद बुंदेलखंड विशेष पैकेज के अंतर्गत योजना के क्रियान्वयन के दौरान 6 जिलों में निर्मित, निर्माणाधीन कार्यों के निरीक्षण में महत्वपूर्ण त्रुटियां एवं अनियमितताएं पाई गई हैं।

जांच रिपोर्ट के मुताबिक छतरपुर में योजना के तहत 85 स्टापडेमों के निर्माण के लिए राशि 2777.00 लाख आवंटित किए थे, जिसमें 2096.00 व्यय किया गया। टीकमगढ़ में 65 स्टापडेमों के निर्माण के लिए राशि 2088.00 लाख स्वीकृति जारी की गई थी, जिसमें 1611.65 लाख व्यय किया गया। दमोह में 53 स्टापडेमों के निर्माण के लिए 1855.00 लाख में से 1691.00 लाख व्यय किए गए। दतिया में 28 स्टापडेमों के लिए1198.22 लाख की राशि, जिला पन्ना में 35 स्टापडेमों के निर्माण के लिए 1578.00 लाख, सागर में योजना के तहत 84 स्टापडेमों के निर्माण के लिए 4017.00 लाख रुपए की स्वीकृति दी गई थी। इन कार्यों की जांच मुख्य तकनीकी परीक्षक द्वारा पवन घुवारा की शिकायत पर रेंडम बेस के आधार पर इन जिलों में की गई।

किस जिले में कितनी राशि खर्च की गई

निर्माण के दौरान वरिष्ठ अभियंताओं एवं राज्य स्तरीय क्वालिटी मानीटर द्वारा जारी निरीक्षण प्रतिवेदनों में निर्देशों का मैदानी अधिकारियों द्वारा पालन नहीं किया गया।

5. अनुबंध की कंडिका 19 के अनुसार स्टाप डैम निर्माण में कार्य पूर्ण होने के बाद 2 वर्ष 45 दिन तक डिफेक्ट लायबिलिटी के तहत संबंधित ठेकेदार से निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद कार्यपालन यंत्री द्वारा सुधार कार्य कराया जाना था। जांच दौरान पाया गया कि अधिकांश कार्यपालन यंत्री द्वारा इस अवधि में सुधार, मरम्मत कार्य के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

4. निर्माण के दौरान मैदानी अधिकारियों द्वारा समुचित ढंग से पर्यवेक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन का अभाव व ठेकेदार द्वारा मनमर्जी से कार्य किया जाना पाया गया। मध्यप्रदेश कार्य विभाग नियमावली की धारा 2 के पैरा 4.040 में दिए गए निर्देश के अनुरूप अपने अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा किए गए मापों का सत्यापन नहीं किया गया। जिसके कारण भी निर्माण कार्य की गुणवत्ता प्रभावित हुई है।

6. अनुबंध निरस्त किए जाने व द्वितीय एजेंसी निर्धारण किए जाने के बाद प्रथम ठेकेदार के विरुद्ध अनुबंध की कंडिका के अनुसार कार्रवाई नहीं की गई। प्रथम ठेकेदार के विरुद्ध अनुबंधानुसार कार्रवाई किए जाने के संबंध में विभागीय अधिकारियों ने कोई रूचि नहीं दिखाई। द्वितीय एजेंसी (डेबिटेबिल एजेंसी) के निर्धारण के बाद भी प्रथम ठेकेदार का अंतिम देयक तैयार कर निरीक्षण दिनांक तक अंतिम रूप नहीं दिया गया। प्रथम अनुबंध निरस्त करने पर शेष कार्य की निविदा आमंत्रित ना की जाकर प्रत्येक स्टापडैम के लिए पृथक-पृथक अनुबंध संपादित किया जाना संभागीय कार्यालय की त्रुटिपूर्ण कार्रवाई है। प्रथम ठेकेदार द्वारा छोड़े गए शेष कार्य पर निविदा आमंत्रित ना किए जाने से व इस कारण शेष कार्य की अतिरिक्त लागत की राशि संबंधित ठेकेदार से वसूल न होने पर संभागीय कार्यालय एवं निविदा स्वीकृतकर्ता अधिकारी की गंभीर त्रुटि है। जिसका उत्तरदायित्व का निर्धारण किया जाना आवश्यक है।

2. स्वीकृति प्राक्कलन एवं डीपीआर में प्रावधान के बाद भी अपस्ट्रीम व डाउनस्ट्रीम साइड में डिजाइन के अनुसार गहराई में कट आफ वाल एवं की वाल का निर्माण नहीं किया जाना पाया गया। एप्रोन के साथ कट आफ वाल का निर्माण ना किए जाने से एप्रोन, फ्लोर क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। डाउन स्ट्रीम साइड में कट आफ वाल के नीचे स्वीकृत प्रावधान अनुसार बोल्डर एप्रोन का निर्माण नहीं किया गया है। फलस्वरूप डाउनस्ट्रीम साइड में नाला तल में कटाव प्रारंभ हो गया है। प्रोटेक्शन कार्य अपूर्ण होने से किनारों के कटने की आशंका है।

3. स्वीकृत प्राक्कलन एवं डीपीआर में प्रावधान के बाद भी अधिकांश स्टाप डैम में लोहे के गेट नहीं लगाए गए हैं। बहुत कम स्थानों पर लगाए गए लोहे के गेट अमानक होने के कारण क्षतिग्रस्त हो गए हैं। लोहे के गेट के स्थान पर कांक्रीट की कड़ी शटर्स मानक स्तर की ना होने कारण अधिकांश स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई हैं। कुछ स्थानों में पाया गया कि मुख्य बाडीवाल में गेट के छोड़े गए स्थान पर लोहे के गेट के बदले आंधी ऊंचाई तक कांक्रीट कर दिया है। जिसके फलस्वरूप पानी भंडारण क्षमता कम होना निश्चित है।

1. कार्य का संपादन प्राक्कलन पर प्रदाय प्रथम स्तरीय स्वीकृति के आधार पर कुछ स्थानों पर किया जाना पाया गया। ठेकेदार को कार्य आदेश जारी करने के पूर्व कार्य की विस्तृत ड्राइंग व विस्तृत प्राक्कलन तैयार कर सक्षम अधिकारी से स्वीकृति प्राप्त किए बिना ही निर्माण कार्य प्रारंभ किया जाना पाया गया। कंसल्टेंट द्वारा बनाए गए डीपीआर पर प्रदाय तकनीकी स्वीकृति के अनुसार अधिकांश कार्यस्थलों पर निर्माण कार्य नहीं किया जाना पाया गया। कार्य पूर्ण होने पर व्यय की गई राशि व प्रशासकीय स्वीकृति, तकनीकी स्वीकृति की राशि में अंतर पाया गया है। कुछ स्थानों पर तो प्रशासकीय स्वीकृति की राशि से आधी राशि में ही कार्य पूर्ण हो गया है। तीन स्थानों पर यह पाया गया है कि स्टाप डैम के निर्माण के लिए तकनीकी स्वीकृति जारी की गई, परंतु बाद में स्थल पर स्टाप डैम कम रपटा का निर्माण कर दिया गया।

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